चिरजा.. खटुन्दरा राय री..
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धिन.....खुन्टुन्दरा....राय..नमो,
थांरो वेद विमल जस छाय रयो..
वेद विमल....जस छाय..रिया,
मढ़ सब रो मन लुभाय रियो..(टेर)
तम बढ्यो अवनी पर....भारी,
जळ सगळो पाताळ .....गयो!
श्रापित हो वसुधा कांपी जद .
सेवक मन संताप....भयो !!(1)
धिन खुन्टुन्दरा....राय.....नमो,
थांरो वेद विमल जस छाय रयो..
छोङ धाम नाडा...शक्तिसुत,
अवनी पर आ ध्यान कियो !
ॠषी श्राप सू श्रापित धरणी,
जिण कारण अंधकार भयो!!(2)
धिन खुन्टुन्दरा....राय.....नमो,
थांरो वेद विमल जस छाय रयो..
आकर सिमरी जूनी.....जोगण,
माँ आवड़ जद दरस...... दियो !
भली बिराजो माढ धरा मांही,
ओ... ढुंढाड़ो....देश....भयो!!(3)
धिन खुन्टुन्दरा....राय.....नमो,
थांरो वेद विमल जस छाय रयो...
सातों सगत्यां......राजी होकर ,
सुत ने सब....वरदान.....दियो!
उदर सूं जळ देकर माँ आवड़,
गांव खटुन्दरा...नाम...दियो !!(4)
धिन खुन्टुन्दरा....राय.....नमो,
थांरो वेद विमल जस छाय रयो...
सेवग.....शरणे....सोरा....राखी,
अब तो मायड़ ...मान...कहयो!
शुभ री घडी़ आवो......सुरराया,
दर्शण दे.... हरसाय...जियो !!(5)
धिन खुन्टुन्दरा....राय.....नमो,
थांरा वेद विमल जस छाय रयो....
आवो मायड़.....करूं....आरतो,
सोहन झारो... साथ...लियो!!(6)
चरण पखारूं....मात... चाव सूं,
सुगन्धित सुमन बिछाय...रहयो!!
धिन खुन्टुन्दरा....राय.....नमो,
थांरा वेद विमल जस छाय रयो....
आवड़ रूप... इन्द्रेश...पधारया,
मुरती सहित माँ थान....थप्यो!
जगमग जोत करी मढ.. मांही,
आवड़ नाम श्री मुख जप्यो..(8)
धिन.....खुन्टुन्दरा....राय.....नमो,
थांरो वेद...विमल जस छाय रयो..
जुल्मी घणो......जगत है...अम्बा,
पग पग पर...ऊळझाय.....रहयो!
आवड़....एक...आधार है...थांरो,
निशदिन मायड़ नाम..लियो!!(9)
धिन.....खुन्टुन्दरा.... राय..नमो,
थांरो वेद विमल जस छाय रहयो..
सुत शरणे...कुलदीप...पालावत,
सुख सम्पत माँ....मांग.... रहयो!
बारठ रिछपाल चरण रे.....शरणे,
चिरजा भेंट चढाय रहयो!!(10)
धिन.....खुन्टुन्दरा....राय..नमो,
थांरो वेद विमल जस छाय रयो..
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