( ॐ ऐं ह्रीं क्ली चामुण्डायै विच्चै )
आरती श्री खटुन्दरा राय
आरती श्री खटुन्दरा राय
टेर-आरती खटुन्दरा राई की, सकल सन्ताप हराई की
1--शीश पर मुकुट छत्र साजे ,
भाल सिन्दूर तिलक राजे,
माल गल पुष्पन की साजे,
आवड़ अवतार, सजो सिणगार, छवि अणपार,
सगत सब रास रचाई की, सकल सन्ताप हराई की, आरती खटुन्दरा राई की ।
2--बाल नित दर्शन हित आवे, दरस कर हिवड़ो हरसावे,
आरती री धुन्न अति भावे,
नोपत निषाण, घुरे घमसाण, देवी दयावाण, दया उर मात धराई की,
सकल सन्ताप हराई की,आरती खटुन्दरा राई की।
3--भाल पर राखों अंक थारा,
सहाई सगत रहो सारा,
सरण म सेवक मां थारा,
बालक अनजान, देवो मां ज्ञान, धरू नित ध्यान,
सरण सगत सुरराई की,
सकल सन्ताप हराई की,आरती खटुन्दरा राई की।
4--कपूर की लपट महक आली,
सुपारी धूप-द्विप थाली,
झारी है गंगा जल वाली,
जग्गे मढं जोत, मात खुश होत, भक्त उभा भोत,
दया निधि दरश दिराई की,
सकल सन्ताप हराई की, आरती खटुन्दरा राई की।
5--तुम्ही हो ब्रह्म जोत माता,
देव गण सरणे सब आता ,
ऊमर रोटी भक्त तुम्हीं से पाता,
सगत शीर मोड, काटे कष्ट करोड़, भक्त आवे दौड़, सरण सांची सुरराई की,
सकल सन्ताप हराई की,आरती खटुन्दरा राई की ।
6--आपरा दर्शन अति भारी,
होय रही मण्ढ में जयकारी,
अनुपम महिमा है थारी,
बड़ों दरबार, मात सरकार, करो जयकार, जय देशाणा राई की,
सकल सन्ताप हराई की,आरती खटुन्दरा राई की ।
7--जेज पल एक मति किज्यो,
भगत की झोली भर दिज्यो,
हर्ष मोहे ज्ञान बुद्धि दिज्यों,
रन्जु की लाज, रखो मां आज, करो मम् काज, सरण मां आवड़ आई की,
सकल सन्ताप हराई की,आरती खटुन्दरा राई की •••
कृत--रन्जु कंवर बारेठ D/O वासुदेव सिंह बारेठ
गांव-- खटुन्दरा, खण्डेला, सीकर(राज•)
भाल सिन्दूर तिलक राजे,
माल गल पुष्पन की साजे,
आवड़ अवतार, सजो सिणगार, छवि अणपार,
सगत सब रास रचाई की, सकल सन्ताप हराई की, आरती खटुन्दरा राई की ।
2--बाल नित दर्शन हित आवे, दरस कर हिवड़ो हरसावे,
आरती री धुन्न अति भावे,
नोपत निषाण, घुरे घमसाण, देवी दयावाण, दया उर मात धराई की,
सकल सन्ताप हराई की,आरती खटुन्दरा राई की।
3--भाल पर राखों अंक थारा,
सहाई सगत रहो सारा,
सरण म सेवक मां थारा,
बालक अनजान, देवो मां ज्ञान, धरू नित ध्यान,
सरण सगत सुरराई की,
सकल सन्ताप हराई की,आरती खटुन्दरा राई की।
4--कपूर की लपट महक आली,
सुपारी धूप-द्विप थाली,
झारी है गंगा जल वाली,
जग्गे मढं जोत, मात खुश होत, भक्त उभा भोत,
दया निधि दरश दिराई की,
सकल सन्ताप हराई की, आरती खटुन्दरा राई की।
5--तुम्ही हो ब्रह्म जोत माता,
देव गण सरणे सब आता ,
ऊमर रोटी भक्त तुम्हीं से पाता,
सगत शीर मोड, काटे कष्ट करोड़, भक्त आवे दौड़, सरण सांची सुरराई की,
सकल सन्ताप हराई की,आरती खटुन्दरा राई की ।
6--आपरा दर्शन अति भारी,
होय रही मण्ढ में जयकारी,
अनुपम महिमा है थारी,
बड़ों दरबार, मात सरकार, करो जयकार, जय देशाणा राई की,
सकल सन्ताप हराई की,आरती खटुन्दरा राई की ।
7--जेज पल एक मति किज्यो,
भगत की झोली भर दिज्यो,
हर्ष मोहे ज्ञान बुद्धि दिज्यों,
रन्जु की लाज, रखो मां आज, करो मम् काज, सरण मां आवड़ आई की,
सकल सन्ताप हराई की,आरती खटुन्दरा राई की •••
कृत--रन्जु कंवर बारेठ D/O वासुदेव सिंह बारेठ
गांव-- खटुन्दरा, खण्डेला, सीकर(राज•)
Nice
जवाब देंहटाएंGood
जवाब देंहटाएंJai mata ji ki
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