मंगलवार, 29 अक्टूबर 2019
सोमवार, 7 अक्टूबर 2019
Barh Maso
बारह मासो
दोहा
समरुं माता सरसती , अविचल वाणी आप ।
गुण गावूं गोविंद रा , टळे भवो भव पाप ।।1।।
कान छोड़ हमको गया , सघळे गोपी साथ ।।
प्रभु आय द्वारापुरी , राज करे रघुनाथ ।।2।।
म्हें रहूं गोकुळ गाम में , कान बतावो कोय ।।
अब जंखना ऐसी करुं ,श्याम संदेशो सोय ।।3।।
विधाता तमने विनवूं ,नहीं नेड़ो इ नेठ ।।
ऐकर माधव आवजो , जद आयो आ जेठ ।।4।।
छंद जाट सारसी
अब जेठ आयो लहर लायो संत सायो सामने
जादव जायो नाथ नायो केंण कायो कामने
मन वेंण वाता रंग राता गोपी गाता ज्ञान ने
भरपूर जोबन मांय भामण कहे राधा कान ने ।।1।।
दोहा:-
दिनड़ा गिणत मास गया ,काळी घटा घन काढ़ ।।
ऐकर माधव आवजो आयो मास आषाढ़ ।।
छंद
आषाढ़ आतो मेघ मातो वाय वातो वादळां
धर नीर धारा ऐम मोरा सांमी कोरा सांभळां
वाजीन्त्र वाजा गिरी गाजा मेली माजा मानने
भरपूर जोबन .................................।।2।।
दोहा
त्रिजो बेठो तव हिंसके , ऐणे पूरी आस ।।
अलबेला अब आवजो , (मन) मोहे सावण मास ।।
छंद
श्रावण सारा जरे जारा केक तारा कामणी
पेरे पटोळा रंग रसोळा भमे टोळा भामणी
शिणगार सजिये रूप रजिये अलील तजिये आमने
भरपूर जोबन ...................................।।3।।
दोहा
नह आवो तो नाथजी ,पाड़िश म्हारा प्राण ।।
गड़ड़ड़ अम्बर गाजियो , जोर भाद्रवों जाण ।।
छंद
भ्रमाय भाद्रव दहे दाद्रव अब जादव आवता
ग्रहे हेक गोरा साद सकोरा बहु मोरा बोलता
सत वेण सारूं मन म्हारूं धरे तारा ध्यान ने
भरपूर जोबन ................................।।4।।
दोहा
सात्राळ मों सहेलियां , रंग भेनुं ब्रज रास ।।
अलबेला अब आवजो , मोहकारी आसो मास ।।
छंद
आसो ऐम करुं केम प्रीति ऐम पूरीये ।
ओसिन्त्र आवे नींद नावे मन भावे मोहीये
नीर झरे नेणें जम जेणे सांम वेणे सानने
भरपूर जोबन..................................।।5।।
दोहा
सरवे आसो चालियो , हुओ मन अधक हुल्लास ।।
राधा कहि सुण गोपिका कही कारतक मास ।।
छंद
कारतक मासो आवे आसो मन सासो मावजी
जोवे फेर जाती रूड़े राती लता.गोपी लावजी
बुधवन्त डाया वेण वाया कणें काया कानने
भरपूर जोबन.….......…....................।।6।।
दोहा
संभा दौड़ी सांभळे , थीर नहीं मन थाय ।।
आवो व्रजवासी अबे , मगसर महिना मांय ।।
छंद
मगसर माधा मन बाधा जोवे राधा राजिये
गल गोप गेली बाळ बेली प्रीत पेली पोहिये
सोळ सो सहेली खेल खेली अलबेली आनने
भरपूर जोबन…...............................।।7।।
दोहा
धीरज राख़ो माधवा राख़ो नह मन रोष ।।
दाड़ा जावे दोयला , प्रभू बेठो पोष ।।
छंद
पोष ज पेला मन मेला अलबेला आणिये
तलखत संतर ऐम अंतर दहि थर थर दाझिये
कांनड़ काळा छो छोगाळा मर्म माळा मानने
भरपूर जोबन……...............................।।8।।
दोहा
सिणगार पहन शोभता , गीत घरो घर गाय ।।
तोरण बांध्यो अंब तणो , माह महीने मांय ।।
छंद
माह कारी जाय भारी नेह जारी नेण थी
सोहे सँभारी नेण धारी वारी वारी वेण थी
मुंजे छे माथण हाले हाथण सर्वे साथण सानने
भरपूर जोबन........................................।।9।।
दोहा
कपटी नावे कानजी , गिरधर गोकुळ गाम ।।
सुवास लगे सुहामणो ,फागण फूल फलाम ।।
छंद
फागण फंगा शोभे रंगा आप संगा ओपिये
मुळरंग माया नींद न आया कंस काया कोपिये
भामण भोळी रमे होळी तेम टोळी तांनने
भरपूर जोबन.......................................।।10।।
दोहा
अबळा अरजी आपिये , खुद राधा मन खंत ।
नेण चोधारा नीसरे , चेत्र लागो समंत ।।
छंद
चैत्र सांमी गरुड़ गामी अंतर जांमी आविये
गिरधर धारण कंस मारण धेन सारण धाविये
ब्रज बाळा सो छोगाळा वेश काळा वांनने
भरपूर जोबन.......................................।।11।।
दोहा
अढारे भार एक दृढ़ा ,वीठल फाळा वन्न ।।
कोयलड़ी टहुका करे , वैशाख वेळा दन्न ।।
छंद
वैशाख वळियो फूल फळियो ऐम वळियो आवियो
निरखंत नितंग राज रितंग गोपी गीतंग गावियो
मन मांय मधुरो प्रेम पूरो गाय भूरो ज्ञानने
भरपूर जोबन .…............................।।12।।
रचना कृत कानजी बारोट (टंकन मीठा मीर डभाल)
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